prayag sangeet samiti vocal question paper​ 2023

prayag sangeet samiti vocal question paper​

द्वितीय वर्ष – तन्त्रवाद्य

दिसम्बर 2023 परीक्षा

समय : 3 घण्टे
पूर्णांक : 50

नोट:

खण्ड ‘क’ एवं खण्ड ‘ख’ के सभी प्रश्नों को करना अनिवार्य है तथा खण्ड ‘ग’ से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दें।


खण्ड ‘क’

1. (क) रिक्त स्थानों की पूर्ति करें।

(1 × 5 = 5)

  1. राग यमनवादी रागों की जाति …………….. है।
  2. राग भैरवी के …………….. स्वर कोमल लगते हैं।
  3. राग जौनपुरी की रचना …………….. थाट से हुई है।
  4. चार ताल में …………….. मात्राएँ होती हैं।
  5. राग का दूसरा महत्वपूर्ण स्वर …………….. कहलाता है।

(ख) सही क्रम से मिलान करें।

(1 × 5 = 5)

क्रमरागविशेषता
1मालकोश(क) ग, नि कोमल आरोह में रे, ध वर्ज
2हमीर(ख) आरोह में शुद्ध नी तथा अवरोह में कोमल नी, ग, ध वर्ज
3भीमपलासी(ग) आरोह में ग, ध वर्ज, अवरोह में सातों स्वर
4वृन्दावनी सारंग(घ) दोनों म में
5दरबारी(ङ) ग, ध, नि कोमल, रे, प वर्ज

खण्ड ‘ख’

2. अति लघु उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर दें।

(1 × 10 = 10)

  1. आलाप किसे कहते हैं?
  2. कौन सी ताल 8 मात्रा की होती है?
  3. राग की उत्पत्ति किससे मानी गयी है?
  4. आश्रय राग से क्या तात्पर्य है?
  5. सप्तक कितने प्रकार के होते हैं, नाम लिखिए।
  6. लय के प्रकार बताइए।
  7. स्वर किसे कहते हैं? ये कितने प्रकार के होते हैं?
  8. दीपचन्दी ताल में कितनी मात्रा होती है?
  9. स्वर से क्या तात्पर्य है?
  10. राग की मुख्य जातियों के नाम लिखिए।

3. लघु उत्तरीय

किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर 40–50 शब्दों में दें।

(2½ × 4 = 10)

  1. वाद्य कितने प्रकार के होते हैं? आपका वाद्य किस श्रेणी के अन्तर्गत आता है?
  2. राग वृन्दावनी सारंग का पूर्ण परिचय देते हुए इसकी विशेषता के साथ आरोह, अवरोह व पकड़ लिखिए।
  3. खटका और मुर्की से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित बताइये।
  4. थाट की परिभाषा देते हुए इनके नाम लिखिए।
  5. किन्हीं चार पर टिप्पणी लिखिए –
    गमक, ध्वनि, कम्पन, झाला, गत, सूत, मींड, तोड़ों
  6. वाद्य स्वर का राग के समय से क्या सम्बन्ध है?

खण्ड ‘ग’

4. दीर्घ उत्तरीय

किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर 150–200 शब्दों में दें।

(10 × 2 = 20)

  1. अपने पाठ्यक्रम के किसी एक राग में रजाखानी गत तीन तोड़ों के साथ लिखिए।
  2. 10 मात्रा की किसी ताल का परिचय देते हुए ठाह व दुगुन में लिखिए।
  3. किन्हीं दो जोड़ियों की तुलना करें –
    वर्ज-विवादी, मसीतखानी-रजाखानी, औड़ब-चाड़व, आश्रय राग-जन्य राग
  4. भातखण्डे अथवा विष्णु दिगम्बर स्वरलिपि को लिखिए।
  5. तानसेन या अमीर खुसरो का जीवन परिचय तथा संगीत में उनका योगदान बताइए।

समय : 3 घण्टे | पूर्णांक : 50

द्वितीय वर्ष – तन्त्रवाद्य

दिसम्बर 2023 परीक्षा – पूर्ण समाधान

समय : 3 घण्टे
पूर्णांक : 50


खण्ड ‘क’

1. (क) रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. राग यमन की जाति

उत्तर: सम्पूर्ण–सम्पूर्ण।

2. राग भैरवी के कितने स्वर कोमल लगते हैं?

उत्तर: चार स्वर – रे, ग, ध और नि

3. राग जौनपुरी की रचना किस थाट से हुई है?

उत्तर: आसावरी थाट

4. चार ताल में कितनी मात्राएँ होती हैं?

उत्तर: 12 मात्राएँ

5. राग का दूसरा महत्वपूर्ण स्वर क्या कहलाता है?

उत्तर: संवादी स्वर


1. (ख) सही क्रम से मिलान

उत्तर:

  1. मालकोश — ग, ध, नि कोमल
  2. हमीर — आरोह में शुद्ध नि तथा अवरोह में कोमल स्वर वाला प्रयोग
  3. भीमपलासी — आरोह में ग और ध वर्जित
  4. वृन्दावनी सारंग — दोनों म का प्रयोग
  5. दरबारी — ग, ध, नि कोमल

संक्षिप्त व्याख्या

मालकोश: इसमें सा, कोमल ग, शुद्ध म, कोमल ध और कोमल नि का प्रयोग होता है।

भीमपलासी: इसका आरोह औड़व तथा अवरोह सम्पूर्ण माना जाता है। आरोह में ग और ध वर्जित रहते हैं।

वृन्दावनी सारंग: इसमें दोनों मध्यम का प्रयोग मिलता है।

दरबारी कान्हड़ा: इसमें कोमल ग, कोमल ध और कोमल नि का प्रमुख प्रयोग होता है।


खण्ड ‘ख’

2. अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. आलाप किसे कहते हैं?

उत्तर:
राग के स्वरों को बिना ताल के धीरे-धीरे विस्तारपूर्वक प्रस्तुत करना आलाप कहलाता है। इससे राग का स्वरूप स्पष्ट होता है।


2. कौन-सी ताल 8 मात्रा की होती है?

उत्तर:
केहरवा ताल 8 मात्रा की होती है।

विभाग: 4 + 4

ठेका:
धा गे ना ति | ना का धि ना


3. राग की उत्पत्ति किससे मानी गई है?

उत्तर:
रागों की उत्पत्ति का आधार थाट माना जाता है।


4. आश्रय राग से क्या तात्पर्य है?

उत्तर:
जिस राग के नाम पर किसी थाट का नाम रखा जाता है तथा जो उस थाट के स्वरूप को स्पष्ट करता है, उसे आश्रय राग कहते हैं।


5. सप्तक कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर:
सप्तक मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं—

  1. मन्द्र सप्तक
  2. मध्य सप्तक
  3. तार सप्तक

6. लय के प्रकार बताइए।

उत्तर:
लय के मुख्य तीन प्रकार हैं—

  1. विलम्बित लय
  2. मध्य लय
  3. द्रुत लय

7. स्वर किसे कहते हैं? ये कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर:
जो ध्वनि कानों को मधुर एवं स्थिर लगे तथा संगीत में प्रयोग की जा सके, उसे स्वर कहते हैं।

स्वर मुख्यतः दो प्रकार के माने जाते हैं—

  1. शुद्ध स्वर
  2. विकृत स्वर

8. दीपचन्दी ताल में कितनी मात्राएँ होती हैं?

उत्तर:
दीपचन्दी ताल में 14 मात्राएँ होती हैं।

इसके चार विभाग होते हैं:

3 + 4 + 3 + 4


9. स्वर से क्या तात्पर्य है?

उत्तर:
संगीत में निश्चित ऊँचाई तथा मधुरता वाली ध्वनि को स्वर कहते हैं। भारतीय संगीत में सात शुद्ध स्वर हैं—सा, रे, ग, म, प, ध, नि।


10. राग की मुख्य जातियों के नाम लिखिए।

उत्तर:
राग की तीन मुख्य जातियाँ हैं—

  1. औड़व – पाँच स्वर
  2. षाड़व – छह स्वर
  3. सम्पूर्ण – सात स्वर

3. लघु उत्तरीय प्रश्न

1. वाद्य कितने प्रकार के होते हैं? आपका वाद्य किस श्रेणी में आता है?

उत्तर:
भारतीय संगीत में वाद्य मुख्यतः चार प्रकार के माने जाते हैं—

  1. तत् वाद्य
  2. सुषिर वाद्य
  3. अवनद्ध वाद्य
  4. घन वाद्य

तन्त्रवाद्य तत् वाद्य की श्रेणी में आते हैं। जिन वाद्यों में तारों को झंकारकर या बजाकर स्वर उत्पन्न किया जाता है, वे तत् वाद्य कहलाते हैं। सितार, सरोद, वीणा आदि इसके उदाहरण हैं।


2. राग वृन्दावनी सारंग का परिचय दीजिए।

उत्तर:

थाट: काफी
जाति: औड़व–षाड़व
वादी स्वर: रे
संवादी स्वर:
समय: दोपहर

आरोह:
सा रे म प नि सां

अवरोह:
सां नि प म रे म प सा

इस राग में दोनों मध्यमों का प्रयोग पाया जाता है। राग का स्वरूप सरल, मधुर और भक्तिपूर्ण है।

पकड़:
रे म प, नि प, म रे, सा


3. खटका और मुर्की से क्या समझते हैं?

उत्तर:

खटका:
किसी मुख्य स्वर के चारों ओर के स्वरों को तेजी से स्पर्श करते हुए मुख्य स्वर को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना खटका कहलाता है।

मुर्की:
दो या अधिक स्वरों का बहुत तेजी से और छोटे आकार में किया गया अलंकारिक प्रयोग मुर्की कहलाता है।

दोनों का प्रयोग गायन तथा वादन में राग की शोभा बढ़ाने के लिए किया जाता है।


4. थाट की परिभाषा देते हुए इनके नाम लिखिए।

उत्तर:
सात स्वरों के ऐसे क्रमबद्ध समूह को थाट कहते हैं, जिससे रागों की उत्पत्ति मानी जाती है। थाट में सात स्वर होते हैं और उन्हें आरोही क्रम में रखा जाता है।

हिन्दुस्तानी संगीत में पं. विष्णु नारायण भातखण्डे ने 10 थाट माने हैं—

  1. बिलावल
  2. कल्याण
  3. खमाज
  4. काफी
  5. आसावरी
  6. भैरवी
  7. भैरव
  8. मारवा
  9. पूर्वी
  10. तोड़ी

5. निम्न में से चार पर टिप्पणी

(क) गमक

स्वर को विशेष शक्ति और कम्पन के साथ बार-बार आंदोलित करके प्रस्तुत करना गमक कहलाता है।

(ख) ध्वनि

किसी वस्तु के कम्पन से उत्पन्न होने वाली सुनाई देने वाली तरंग को ध्वनि कहते हैं। संगीत में मधुर ध्वनि का विशेष महत्व है।

(ग) कम्पन

किसी स्वर के आसपास हल्के-हल्के स्वर-कम्पन द्वारा उसे सजाने की क्रिया कम्पन कहलाती है।

(घ) मींड

एक स्वर से दूसरे स्वर तक बिना टूटे हुए क्रम से पहुँचने को मींड कहते हैं। तन्त्रवाद्य में मींड का विशेष महत्व है।

(ङ) झाला

वाद्य संगीत में मुख्य स्वर तथा तारों को तीव्र गति से बजाते हुए लय को तीव्र करना झाला कहलाता है।

(च) गत

वाद्य संगीत में किसी राग के स्वरों को निश्चित ताल और लय में बाँधकर प्रस्तुत की गई रचना को गत कहते हैं।


6. वाद्य स्वर का राग के समय से क्या सम्बन्ध है?

उत्तर:
भारतीय शास्त्रीय संगीत में रागों का समय-विभाजन महत्वपूर्ण माना जाता है। विभिन्न रागों को दिन और रात के अलग-अलग समय पर प्रस्तुत करने की परम्परा है।

राग के स्वर, उसका भाव और समय एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। वाद्य संगीत में भी राग प्रस्तुत करते समय उसके निर्धारित समय तथा भाव का ध्यान रखा जाता है।


खण्ड ‘ग’

4. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. किसी एक राग में रजाखानी गत तीन तोड़ों के साथ लिखिए।

राग यमन

थाट: कल्याण
जाति: सम्पूर्ण–सम्पूर्ण
वादी:
संवादी: नि
समय: रात्रि का प्रथम प्रहर

आरोह:

नि रे ग म॑ प ध नि सां

अवरोह:

सां नि ध प म॑ ग रे सा

पकड़:

नि रे ग, रे ग, प रे, सा

रजाखानी गत

ताल – तीनताल

धा धिन धिन धा | धा धिन धिन धा
धा तिन तिन ता | ता धिन धिन धा

गत के साथ राग के स्वरूप के अनुसार आलंकारिक तान और तोड़ों का प्रयोग किया जाता है।

तोड़ 1:

नि रे ग म॑, ग रे सा | रे ग म॑ प, म॑ ग रे

तोड़ 2:

ग म॑ प ध, नि ध प | म॑ ग रे सा, नि रे ग

तोड़ 3:

नि रे ग म॑ प, ध नि सां | सां नि ध प, म॑ ग रे सा


2. 10 मात्रा की किसी ताल का परिचय देते हुए ठाह और दुगुन में लिखिए।

झपताल

मात्रा: 10
विभाग: 2 + 3 + 2 + 3

तालियाँ: 1, 3, 8
खाली: 6

ठेका:

धि ना | धि धि ना | ति ना | धि धि ना

ठाह

ठाह में ताल की मूल गति में बोल प्रस्तुत किए जाते हैं:

धि ना | धि धि ना | ति ना | धि धि ना

दुगुन

दुगुन में मूल लय से दो गुनी गति में बोल प्रस्तुत किए जाते हैं।

धि ना धि धि ना | ति ना धि धि ना
धि ना धि धि ना | ति ना धि धि ना


3. किन्हीं दो जोड़ियों की तुलना

(क) वर्ज और विवादी

वर्ज स्वर:
किसी राग में जिस स्वर का प्रयोग नहीं किया जाता, उसे वर्ज स्वर कहते हैं।

विवादी स्वर:
जो स्वर राग के प्रमुख स्वरूप से विरोध उत्पन्न करता है तथा सामान्यतः राग में प्रयोग नहीं किया जाता, उसे विवादी स्वर कहते हैं।


(ख) मसीतखानी और रजाखानी

मसीतखानी गत:
यह विलम्बित लय में प्रस्तुत की जाती है। इसका स्वरूप गंभीर और विस्तारप्रधान होता है।

रजाखानी गत:
यह अपेक्षाकृत तेज लय में प्रस्तुत की जाती है। इसमें चंचलता और लयकारी अधिक होती है।


(ग) औड़व और षाड़व

औड़व:
जिस राग में पाँच स्वरों का प्रयोग हो, वह औड़व जाति का राग कहलाता है।

षाड़व:
जिस राग में छह स्वरों का प्रयोग हो, वह षाड़व जाति का राग कहलाता है।


(घ) आश्रय राग और जन्य राग

आश्रय राग:
जो राग किसी थाट का प्रतिनिधित्व करता है और जिसके आधार पर थाट का नाम निर्धारित किया जाता है, उसे आश्रय राग कहते हैं।

जन्य राग:
जो राग किसी थाट से उत्पन्न माना जाता है, उसे जन्य राग कहते हैं।


4. भातखण्डे अथवा विष्णु दिगम्बर स्वरलिपि

भातखण्डे स्वरलिपि

पं. विष्णु नारायण भातखण्डे ने भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए स्वरलिपि पद्धति को व्यवस्थित रूप दिया। इसमें सा, रे, ग, म, प, ध, नि स्वरों का प्रयोग किया जाता है।

कोमल स्वर को विशेष चिह्न द्वारा तथा तीव्र मध्यम को अलग संकेत द्वारा दर्शाया जाता है। मन्द्र और तार सप्तक को भी विशेष चिह्नों द्वारा दिखाया जाता है।

स्वरलिपि के माध्यम से किसी रचना, गत, बंदिश या तालबद्ध रचना को लिखित रूप में सुरक्षित रखा जा सकता है।


5. तानसेन का जीवन परिचय एवं संगीत में योगदान

तानसेन

तानसेन भारतीय संगीत के महानतम संगीतज्ञों में से एक माने जाते हैं। उनका जन्म ग्वालियर क्षेत्र के बेहट नामक स्थान पर माना जाता है। उनका प्रारम्भिक संगीत प्रशिक्षण स्वामी हरिदास से जुड़ा माना जाता है।

बाद में वे मुगल सम्राट अकबर के दरबार में पहुँचे और उनके दरबार के प्रसिद्ध नवरत्नों में शामिल हुए।

तानसेन गायन में अत्यन्त निपुण थे। उन्होंने ध्रुपद गायन परम्परा को विशेष रूप से समृद्ध किया। उनके नाम से कई रागों की परम्पराएँ जुड़ी हुई हैं, जैसे—

  • दरबारी कान्हड़ा
  • मियाँ की टोड़ी
  • मियाँ की मल्हार

भारतीय संगीत के विकास और प्रचार-प्रसार में तानसेन का योगदान अत्यन्त महत्वपूर्ण माना जाता है।


परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण एक-पंक्ति उत्तर

1. यमन का थाट: कल्याण
2. यमन की जाति: सम्पूर्ण–सम्पूर्ण
3. यमन का वादी:
4. यमन का संवादी: नि
5. भैरवी के कोमल स्वर: रे, ग, ध, नि
6. जौनपुरी का थाट: आसावरी
7. केहरवा: 8 मात्रा
8. झपताल: 10 मात्रा
9. दीपचन्दी: 14 मात्रा
10. तीनताल: 16 मात्रा
11. सप्तक: मन्द्र, मध्य, तार
12. लय: विलम्बित, मध्य, द्रुत
13. राग की जातियाँ: औड़व, षाड़व, सम्पूर्ण
14. थाटों की संख्या: 10
15. थाट पद्धति को व्यवस्थित करने वाले: पं. विष्णु नारायण भातखण्डे

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